कुंडली में मारक भाव और मारक ग्रह कौन से हैं
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*कुंडली में, मारक भाव दूसरे और सातवें भाव को माना जाता है, और इनके स्वामी ग्रह मारकेश कहलाते हैं. ये भाव मृत्यु और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से संबंधित होते हैं. इसके अलावा, अष्टम भाव (आयु भाव) और द्वादश भाव (व्यय भाव) भी मारकत्व में भूमिका निभाते हैं.
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*मारक भाव:-
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⚛️दूसरा भाव:-
यह भाव धन, कुटुंब, और वाणी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन मारक ग्रहों के प्रभाव में यह मृत्यु स्थान भी बन जाता है.
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⚛️सातवां भाव:-
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यह विवाह, साझेदारी, और व्यापार का भाव है, लेकिन मारक ग्रहों के प्रभाव में यह मृत्यु स्थान भी माना जाता है.
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⚛️अष्टम भाव:-
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यह आयु का भाव है, और मारक ग्रहों के प्रभाव में यह मृत्यु का कारण बन सकता है.
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⚛️द्वादश भाव:-
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यह व्यय, हानि, और मोक्ष का भाव है, लेकिन मारक ग्रहों के प्रभाव में यह भी मृत्यु स्थान बन सकता है.
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🪐मारक ग्रह:-
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मारक ग्रहों की पहचान कुंडली के भावों और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है. आमतौर पर, दूसरे और सातवें भाव के स्वामी ग्रह मारक ग्रह माने जाते हैं. इसके अलावा, कुछ विशेष परिस्थितियों में, अन्य ग्रह भी मारक ग्रह बन सकते हैं.
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💎कुछ उदाहरण:-
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⚜️वृष लग्न:-
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इस लग्न के लिए मंगल सातवें और बारहवें भाव का स्वामी होता है, और बुध दूसरे और पांचवें भाव का स्वामी होता है.
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⚜️मिथुन लग्न:-
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इस लग्न के लिए चंद्रमा और गुरु दूसरे और सातवें भाव के स्वामी होते हैं.
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⚜️कन्या लग्न:-
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इस लग्न के लिए सूर्य बारहवें भाव का स्वामी होता है, लेकिन यह मृत्यु कारक नहीं होता है.
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🪐मारक ग्रहों का प्रभाव:-
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मारक ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में, व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक, या आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ मामलों में, यह मृत्यु तुल्य कष्ट भी दे सकता है.
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🪐मारक ग्रहों से बचने के उपाय:-
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* मारक ग्रहों की शांति के लिए ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए.

* मारक ग्रहों के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

* दान-पुण्य करना चाहिए.

* पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए.

🛑यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह जानकारी सामान्य है, और प्रत्येक कुंडली की अपनी विशिष्टताएं होती हैं. इसलिए, किसी भी उपाय को करने से पहले, एक अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श करना उचित है.
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