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सुभाषितानिWise sayings of Sanskrit

श्लोक-3
सुवर्णा लेखनी मन्ये धरोहरे मिलेन्ननु।
ज्ञानाति लेखनं नैव चेत्सर्वं व्यर्थमेव हि।।
अर्थः- सोने की कलम शायद विरासत में मिल भी जाए, पर लिखना क्या है इसका ज्ञान न हो तो सब व्यर्थ है। शास्त्री जयपालः भिवानी
श्लोक-2
जलं विना नदी शोच्या,
शून्यमातिथिवर्जितम्।
प्रेमहीनं हि बान्धव्यं,
मित्रहीनं वृथा जगत्॥
जल के बिना नदी शोभाहीन है, अतिथि के बिना आँगन सूना है; प्रेम के बिना बन्धुत्व निष्प्राण है और मित्रों के बिना संसार नीरस प्रतीत होता है। 🌺🙏 कृष्ण वशिष्ठ🙏🌺
श्लोक-1
लघुरपि प्रयासोऽयं न कदाचिद् वृथा भवेत्।
बिन्दुबिन्दुसमायोगाद् भवत्येव महोदधिः॥
छोटा-सा प्रयास भी कभी व्यर्थ नहीं जाता। जैसे बूँद-बूँद के मिलन से विशाल समुद्र बन जाता है, वैसे ही छोटे-छोटे प्रयास बड़ी सफलता का आधार बनते हैं। 🌺🙏 कृष्ण वशिष्ठ🙏🌺
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